School Ki Friendship In Hindi - स्कूल की लाइफ ऐसी होती है जिसे हम कभी भूल नहीं सकते। हम हमेसा School Life को बहुत मिस करते है। अगर भगवान् ने अगर मुझे कुछ मांगने के लिए कहे तो में स्कूल के उन दिनों को मांगूगा। हम जीवन में बहुत सी बातो को भूल जाते है लेकिन School ki Friendship और कमीने यार जिंदगी भर याद रहते है। आज भी में स्कूल के दिनों को याद करता हु तो आज भी आखे नम हो जाती है। बस मेने अपनी स्कूल लाइफ में एक बड़ी गलती की है जिसे में कभी भी भूल नहीं सकता। हम आज आप को एक Sachhi Kahani बता रहे है। आप इस Achhi kahani को पढ़ कर अपने स्कूल के दिन और कमीने यारो की याद ताजा कर सकते है 

स्कूल के कमीने दोस्त और वो लड़की | School Ki Friendship In Hindi

School Ki Friendship In Hindi
School Ki Friendship In Hindi

यह बात सन 2014 की है जब में 9th क्लास में पढ़ा करता था। में गांव के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ा करता था मेने बचपन से ही एक ही स्कूल में पढ़ाई की है इस लिए यह स्कूल हमारे लिए परिवार जैसा लगता था हम सभी दोस्त 1th क्लास से साथ ही पढ़ते आ रहे थे। हमारी क्लास में कुल 32 स्टूडेंट थे जिस में लगभग 10 या 11 हम लड़के थे थे। हम और हमारे दोस्तों का लास्ट 2 की सीट पर हमारा ही कब्जा था। उस समय न किसी लड़की की चाहत थी और ना किसी की बस कुछ कमीने यार थे। हम सभी दोस्तों ने 9th क्लास तक अच्छे से पढ़ाई की लेकिन हमारी लाइफ का कुछ बड़ा शुरू होता है 9th में 

गर्मियों की छुटटी के बाद हमारा स्कूल खुल गया था हम सभी दोस्त अपने क्लास रूम में जाकर बैठ गए थे लेकिन उस दिन क्लास में एक नया चेहरा भी था उसने हमारी स्कूल में नया एडमिशन लिया था उनके हाव भाव से लग रहा था की वह शहरी स्कूल से आई है अब क्या था क्लास में एक नया चेहरा हो और हम लड़के चुपचाप बैठे रहे ये हो नहीं सकता। 

हमने क्लास की साथ की लड़कियों से बात की तो पता चला की उसका नाम तनीषा (नाम बदला हुआ) है और वो पहले अपने मामा के घर पढ़ाई करती थी। शायद वो किसी शहरी स्कूल में पढाई की थी इस लिए वो हिंदी भाषा का उपयोग करती थी हमने कभी हिंदी भाषा का उपयोग नहीं किया था क्योंकि हम लोकल गाँव में रहते थे इसलिए अपनी लोकल भाषा ही बोला करते थे इसी लिए हमें हिंदी बोलने में कुछ शर्म आती थी।

स्कूल के शुरुआत के 15 -20 दिन ऐसे ही गुजर गए फिर हमारा और दोस्तों का क्लास में आतंक शुरू होता है। हम सभी लड़के क्लास में बहुत ही शरारत करते थे कभी तो क्लास में ही लड़ाई शुरू हो जाती थी । ऐसे में हमें वो लड़की तनीषा ने हमें धमकाना शुरू किया अब क्या बताये हमें पहले कभी किसी लड़की ने नहीं धमकाया था। पहले दिन तो हम लड़को ने भी चुप रहना सही समझा नया एडमिशन था

अब हमारी तो मस्ती करने का समय का टाइम था लेकिन ये बात वो लड़की नहीं समझ पाई। मै अभी बता नहीं सकता कि उस समय हम दोस्त बुरे थे या वो तनीषा ?

आखिरकार 1 महीने बाद तनीषा हम सभी लड़को पर बहुत ही हावी हो गई थी। लगभग सभी दोस्त तनीषा दे डरने लगे लेकिन हम कहा डरने वाले थे मै और मेरा 3-4 और दोस्त थे जो तनीषा से नहीं डरते थे लेकिन सच बताऊ तो कभी कभी हमारी भी फट जाती थी। स्कूल में सबसे ज्यादा शिकायत सर के पास मेरी ही जाती थी। डर भी बहुत लगता था कही सर ना पीट दे।

लगभग 5 से 6 महीने बाद सब कुछ नार्मल हो गया था लेकिन मुझे तनीषा का Attitude बहुत अच्छा लगा। इसी बीच स्कूल में पता चला की तनीषा का किसी लड़के के साथ कुछ चक्र चल रहा है।

लेकिन हमें इस बात पर विश्वास नहीं हुआ इस लिये हमने क्लास में कुछ ज्यादा ही हीरोपंती करने लगे (अब लगता है कि हमे उस दिन वो हीरोपंती नहीं करनी चाहिये थी) धीरे धीरे ये बात पुरे स्कूल में फैल गई और स्कूल में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था सभी जगह केवल तनीषा की ही चर्चा हो रही थी

सब टीचर और मेडम क्लास में बहुत बार तनीषा की बेइज्जती की सच बताऊ तो एक मैडम थी जो सबसे ज्यादा बुरा कहती थी। सच में वो दिन तनीषा के लिए बहुत दुःख थे। जब कोई क्लास का साथी इतना दुखी हो तो हमें भी दुख होता है

क्लास में कुछ टॉपर लडकिया भी थी तनीषा आगे की लाइन में उन्ही के पास बैठा करती थी अब उन लड़कियों ने भी तनीषा का साथ छोड़ दिया था अब वो क्लास में बहुत ही शांत सभाव से रहने लगी और पीछे की लाइन में बैठने लगी

हम मानते है उस समय तनीषा के साथ बुरा हुआ लेकिन हम कुछ कर भी नहीं सकते थे इसी लिए हमने भी ज्यादा मस्ति नहीं की और अपना पूरा साल ऐसे ही निकाल दिया।

अब हम 9th क्लास पास करने के बाद बोर्ड क्लास में प्रवेश कर गए थे। अब हमारे सामने हमारा भविष्य था। अब हमें अपनी पढ़ाई में कुछ कर दिखाना था। तब तक तनीषा भी हमारे साथ घुलमिल गई थी कभी कभी तो हमे भी बुरा लगता था कि हमने शायद उस दिन ऐसा नहीं किया होता तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ता। इसी प्रकार हमने छोटी मोटी यादों के साथ अपनी 10th क्लास भी पास कर ली।

अब हम सभी का अलग अलग भविष्य था हमारे भी अच्छे नंबर आये थे इसी लिए हमने भी साइंस (मैथ) लिया हमारे क्लास में से कुल 7 लोग निकल गए थे क्योंकि हमारी स्कूल में साइंस नहीं थी इसीलिए हम दूसरे स्कूल में चले गये।

इसके बाद हमने नये स्कूल में एडमिशन लिया मेरे साथ मेरे गाँव के 3 और दोस्त थे जिसने बचपन में मेरे साथ कुछ साल पढ़े थे लेकिन बाद में 11 क्लास में फिर से मिल जाते है। दूसरी तरफ तनीषा ने भी कॉमर्स विषय को चुना और उसने दूसरे स्कूल में अपना एडमिशन लिया हमने तनीषा के साथ 2 साल तक पढ़ाई की

मेरा नई स्कूल में बिलकुल भी मन नहीं करता था में हमेशा आने पुरानी स्कूल और कमीने यारो को बहुत मिस किया करता था लेकिन मेने स्कूल से जाते जाते एक बात जरूर सिख गया था कि कभी भी ज्यादा नहीं बोलना चाहिए अगर हम ज्यादा नहीं बोलते तो शायद हमे लगता है तनीषा को इतना दुख नहीं सहना पड़ता।

उसके बाद मेने बोलना बहुत कम हो गया और ज्यादा ही शर्मिला हो गया। मतलब की मेरा हाल ऐसा हो गया कि में किसी लड़की से सामने आँख मिलाकर बात भी नहीं कर सकता था। अगर मेडम ने कोई प्रश्न भी पूछ लिया होता तो में उसका जवाज़ जानते हुए भी नहीं दे पाता था।

हमने शुरुरात में ही आगे की बैंच पर बैठना चाहते थे लेकिन भगवान ने पहले ही आगे की बेंच लड़कियों को बाट दिया है इसी लिए हम लड़कियों के जस्ट पीछे वाली बेंच पर बैठा करते थे काम से कम 5 महीने तक मेरा नए स्कूल में जरा भी मन नहीं लगा में बहुत ही काम बोलता था। शायद इसी लिये एक लड़की ने मुझे 12 क्लास में अपना भाई भी बना लिया था।

इसके बाद मेने तनीषा से बहुत बात करने की कोशिश की लेकिन कभी बात नहीं हो पाई। शायद पांच साल में मेने उनको 4-5 बार ही आते जाते देखा था अब तो लगता है उसकी शकल भी धीरे धीरे बुलने लगा हु।

एक बार की बात है शायद 2018 की मेरे एक दोस्त ने बताया की तनीषा Facebook भी चलती है उस रात मेने रात के 3 बजे तक facebook  पर कम से कम 1000 फेसबुक अकाउंट को देख चूका था तब जाकर मेने उसकी प्रोफाइल खोज निकाली और तुरंत फ्रेंड रिकवेस्ट  लगभग सुबह के 3 या 4 बज रहे थे

2 दिन बाद नहीं तनीषा ने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया और अगले ही दिन उसने मेरे फ्रेंड रिकवेस्ट को हटा दिया अब में उसके बाद कभी उसको फ्रेंड रिकवेस्ट सेंड नहीं कर सकता था।

शायद इसके बाद तनीषा ने सोशल मिडिया का उपयोग करना बंद कर दिया इसके बाद मेने कभी तनीषा से कॉन्टेक्ट करने की कोशिश नहीं की।

भगवान् से एक ही दुआ है मरने से पहले बस एक बार तनीषा से बात हो जाये और उन से सॉरी मांग सकू

भगवान् ने कभी उसकी मदद करने का मौका दिया तो उसके लिए जान भी लगा दुगा।

दोस्तों आप को क्या लगता है मुझे तनीषा से बात करनी चाहिए या नहीं आप अपनी राय कमेंट करके जरूर बताये अगर आप चाहते है की में अपनी मुलाकात भी आप के साथ शेयर करू तो आप हमें सोशल मिडिया पर जुड़ सकते है आप आप यह अच्छी कहानी पर पढ़ रहे है।



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